कैशु देव जी

  • !! मान्यतानुसार !!
  • श्री केशु बावजी
  • जीवधारी सभी जीवधारियो की भुमिका का महत्व है । इसी के अन्तर्गत लता पत्ते ( बेल के पान ) भी महत्व रखते हैं । इसी के साथ सूर्यवंशी कुमरावत तम्बोली की पहचान है । । इसी संदर्भ में केशुबावजी ( नारोणा ) बाउ जी का त्यौहार आसोज सदी 15 पर्णिमा को हर्षोलास के साथ मनाया जाता है इसी संदर्भ में प्राचीन काल की कथा प्रचलित है । एक समय तम्बोली समाज का एक व्यक्ति किसी कार्य से कहीं जा रहा था तो रास्ते में वट वृक्ष ( बड़ का झाड़ ) पर स्थित अदृश्य शक्ति ने कहा की भय्या तुम बड़ के झाड़ के पत्ते गिन सकते हो तो आपसी वार्तालाप में शर्त लग गई शर्त के अनुसार अदृश्य शक्ति ने पानवाड़ी को बाकड़ा ( खाखरा साढेणी की अर्तछाल ) की मोरी गिनने का कार्यशुरूव उस तम्बोली व्यक्ति चुने का घोल बनाकर बड़ के पत्तों पर छिड़कदिया व वृक्ष के नीचे बैठ गया थोड़ी देर बाद जब अदृश्य शक्ति पनवाड़ी से बहार आये तो उन्हें मालुम हुआ की वे शर्त के अनुसार हार गये तो उन्हें शर्त के अनुसार पानवाड़ी में सम्पूर्ण कार्य का भार सौंपदिया समयानुसार ( कोल शर्त के अनुसार किसी स्त्री को यह गुप्त रहस्यमालुम नहीं होना चाहिये पर यह बात खुल ही गई जिसमें गुप्त अदृश्य शक्ति ( केशुबावजी)
  • के भोजन की व्यवस्था का रहस्य खुल गया वशर्त पुर्ण हो गई तब केशुबावजी के वचनों जिसमें पानवाड़ी रक्षा के मंत्र के रहस्य समझाकर असोज कम सुदी 10 से पुर्णिमा तक 5 दिनों के इस त्यौहार को मनाने की बात कहकर विदा ( अदृश्य ) हो गए तब से अब तक सूर्यवंशी कुमरावत तम्बोली समाज इस त्यौहार को मनाता आरहा है ओर भविष्य में भी मनाता रहेगा !
  • ओर इस त्यौहार को दिवाली पर्व की तरह बड़े ही धुमधाम से मनाया जाता है
  • मुख्यत श्री( नरोडा बाउ जी) केशु बाउ जी की पुजा – अर्चना गांव – कुकड़ेश्वर , पडदा , भानपुरा , दुधालिया , ओर , झालावाड़ , में बड़े ही हर्षोउल्लास से मनाया जाता है !

kumrawat Tamboli Samaj

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