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  • !! माँ नाना देवी माता जी “पान की बेल” का शुभ आगमन !!
  • प्राचीन कथा
  • जब देव और दानव ने मिलकर समुन्द्र मंथन किया और उसमें से अमृत प्राप्त किया अमृतपान करने के बाद बचा हुआ अमृत कलश में रखकर देवों ने पाताल लोक में शेषनाग की गोद में रखा । कुछ समय बाद उस अमृत कलश के ऊपर चित्रा नक्षत्र में पान की बैल की उत्पत्ति हुई । ।
  • कालान्तर में जब सूर्यवंशी राजा सगर ने अश्व मेघ यज्ञ करवाया तब पान की आवश्यकता पड़ी तब राजा सगर ने नारद जी को पाताल लोक भेज कर पान की बैल लेने के लिए भेजा । नागमाता ने शेषनाग और नारदजी के सामने कुछ वचन ( शर्ते ) रखी ।
  • 1 . पान माता ने कहा कि लोग मुझे खाकर थुकेंगे । तो मेरा अपमान होगा , तो नारद जी ने कहा की पहला थुक में अपने हाथों में लुगा ।
  • 2 . जहाँ मेरा स्थान होगा वहाँ अनावश्यक खान पीन भी न हो ।
  • 3. कर्मो साफ सफाई सत्तकर्म इत्यादि वचनों में बंधकर नारद जी के साथ चार प्रकार की बैल जिसमें गंगेरी , मालवा , बंगला , मीठा कपुरी इत्यादि पान बैले आई और राजा सगर का अश्वमेघ यज्ञ सम्पन्न हुआ और पान का प्रसाद स्वरूप वितरण हुआ , जब प्रसाद वितरण के
  • बाद एक कुम्हार प्रसाद लेने पहुंचा तब पान नहीं बचे थे , तब महाराज सगर ने कुम्हार को पान की बैल का डंकल दे दिया , कुम्हार उस ड्कल को घर , लेकर आया और उसे चॉक के पास गिली मिट्टी में रखा । गिली मिट्टी में बैल चली । जब त्रेता युग में राजाराम ने अश्वमेघ ” अश्व यज्ञ करवाया तब पान की जरूरत पड़ी तो ना पड़ी राजाराम कुम्हार के घर से पान लाए , और अश्वमेघ यज्ञ सम्पन्न करवाया ।
  • उसके बाद राजाराम ने अपने चचेरे भाई को ये । बैल देकर उनसे कहा कि आज से आप इसका उत्पादन करना इसी से आपका गुजर बसर होगा तब से लेकर हा की आज तक इसकी सेवा कर रहे है ।
  • इसी प्रकार रामवंशी होने से हम सूर्यवंशी कहलाये । कुम्हार के वहाँ से लाये इस कारण कुमरावत कहलाये ।
  • पान का दुसरा नाम ताम्बुल है , इस कारण तम्बोली कहलाये ।
  • ” इसी प्रकार हम सूर्यवंशी कुमरावत तम्बोली कहलाये । ।
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    पान का इतिहास
  • पान का उपयोग आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व से किया जा रहा है ! श्री लंका की एक अति प्राचीन पुस्तक
  • महावामसा जो की पाली भाषा में लिखी गई है ! में भी पान ओर उसके उपयोग का महत्व बताया गया है !
  • पान मुख्य रूप से मध्य व पूर्वी मलेशिया में पैदा हुआ था। जोकि बहुत ही जल्द एशिया , पूर्वी अफ्रीका , ओर मेडागास्कर के इलाको में फेल गया ! पान की पैदावार भारत में व्यापक रूप से लगभग सभी जगह होती है ! पान को संस्कृत भाषा मे ताम्बूल कहा जाता है ! भारत में पान की खेती प्राय तम्बोली जाति द्वारा की जाती है !
  • इसका पौधा बहुत ही खूबसूरत आकर्षित ओर सुगन्धित होता है ! जिस पर चमकीले हरे रंग की ह्रदय की आकार की पत्तिया पाई जाती है ! जो की आगे से नुकीली होती है ! खाने के रुप में पान के साथ लोंग , इलायची , व सुपारी का प्रयोग दक्षिण एशिया में व्यापक रूप से किया जाता है ! भारतीय संस्कृति में पान का विशेष महत्त्व है ! यहाँ पूजा पाठ तीज त्योहारों ओर शादी ब्याह में भी पान का प्रयोग किया जाता है ! इसका प्रयोग प्राचीन काल से राजा महाराजा के ज़माने से अथिति सत्कार के लिए किया जाता है ! दक्षिण भारत में विवाहित महिलाओ को कुमकुम, हल्दी, ओर पान सुहाग चिन्ह के रूप में भेट की जाती है!

kumrawat Tamboli Samaj

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