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महिला संदेश

महिलाएँ देश की आधी आबादी का हिस्सा है

महिलाओं की अहमियत स्वीकार करने में देश , प्रदेश, समाज क्यों सोच रहा है। महिलाएँ , देश की आधी आबादी का हिस्सा है।हमें ख़ुद आगे आना होगा और समाज को हमारी अहमियत ,शक्ति का अहसास कराना होगा। डॉ.भीमराव अंबेडकर ने ठीक ही कहा है

“ मैं किसी समाज (समुदाय) की प्रगति , महिलाओं ने जो प्रगति हासिल की है उससे मापता हूं।

“संक्षेप में इतना ही है कि समाज में एक चीज ज़रूरी है , वह है “बदलाव” इसलिए कोई भी अच्छा निर्णय लेने के पहले यह मत सोचिए कि समाज कैसा है , यह ज़रूर सोचिए कि समाज कैसा हो सकता है। न शुभकामनाओं के साथ

जय श्रीकृष्ण।

श्रीमति शीतल शरद कलवाडिया

उज्जैन

विश्व कल्याण का एक मात्र समाधाननारी-उत्थान

यस्य पूजयंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता;

जहाँ नारी की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते है

उपरोक्त श्लोक से स्पष्ट हे की नारी का सम्मान और सुरक्षा कितनी आवश्यक हे!.नारी की वर्तमान मे क्या स्थति हे यह सभी जानते हे!.आज नारी उपभोग की.सजावट की.विलासिता.शोषण की.उपहास की वस्तु बनी हुई हे!.विश्व का उत्थान,नारी उत्थान से ही होगा. नारी उत्थान की संकल्पना:-नारी उत्थान हेतु शिक्षा अत्यंत आवश्यक हे!.शिक्षित नारी ही आत्मनिर्भर बन सकेगी!.नारी की शिक्षा मे दहेज प्रथा बाधक है!.आम आदमी यही सोचता है कि लड़की पराया धन होती है.इसकी शादी के लिये दहेज का इंतजाम करना होगा अतः वह लड़की कि शिक्षा पर ख़र्च नही करता है!.

नारी को प्रारम्भ से ही दोयम

दर्जे का माना जाता है.उसकी बुध्दिमता,क्षमता को हमेशा कम आका जाता है!.पुरुष प्रधान समाज कि इस मानसिकता को बदलना होगा !

बड़े ही खेद के साथ यह कहना पड़ता है कि”स्त्री ही स्त्री की शत्रु होती है”अतःस्वयं नारी समाज को

भी द्रष्टिकोण मे व्यापक बदलाव लाना होगा

श्रीमति रश्मि ड़ॉ संजीव जी कुमरावत

नागदा ज.

नारी ने संस्क्रति का रूप निखारा है!

“जीवन की कला को अपने हाथों से साकार कर , नारी ने संस्क्रति का रूप निखारा है , नारी का असिस्त्व ही सुंदर जीवन का आधार है।” “जीवन की कला को अपने हाथों से साकार कर , नारी ने संस्क्रति का रूप निखारा है , नारी का असिस्त्व ही सुंदर जीवन का आधार है।” हम भारतीय नारियो का जन्म उस देश की मिट्टी में हुआ है, जंहा की भूमि को भारत ” मां ” के नाम से पुकारते है ।यहाँ के पौधे ,पशु को भी हम मां के रूप में पूजते हैं ,अर्थात तुलसी में और गाय को भी हम मां के रूप में देखते है।यहाँ की नारी शकित बहन बेटियों को देवी के रूप में पूजा जाता हैं।आज की महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है।चाहे देश का ,समाज का हो ,सामाजिक क्षेत्र हो या राजनीतिक क्षेत्र हो। महिलाओ में नेतृत्वकर्ता के गुण होते हैं , जो अपने परिवार को इतने सहज और सुंदर तरीके से संजोकर रखती है,वो देश का नेतृत्व ,समाज का कार्य बहुत ही उत्कृष्टता के साथ कर सकती हैं।वर्तमान समयानुसार प्रत्येक नारी को अपने देश,समाज और परिवार के लिए सहयोग कर उनके उत्थान में भागीदार बनना चाहिए। और इस कार्य के लिए मात्रश्कित को अपनी बहू -बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा , उनके आगे बढ़ते कदमो को रोकना नही बलिक उनका सहायक बनना होगा।आज समाज के विकास में मात्रश्कित का योगदान अति आवश्यक हैं , और इस कार्य के लिए हम बेटे -बेटियों में फर्क न करते हुए ,बेटियों को भी उच्च शिक्षा दे ” बेटी बचाव ,बेटी पढ़ाव ” नारे को सार्थक करे ।हमे अपनी बेटियो को ” संस्कारो के साथ सिंचित करना हैं “इस परिवर्तित समय मे हमे आपनी बहू बेटियों को एक मौका देना होगा , उनपर विश्वास कर ,ताकि वो अपने आगे का मार्ग खुद तलाशे ।हमे अपने बच्चों में देशप्रेम , समाजसुधारक ,एकत्व,सहयोगात्मक दयालुता ,सहनशील ,आत्मरक्षक ,मजबूत स्वाभिमानी बनाना होगा। अगर सारी मातृषिक्त जागरूक हो गई ,तो समाज के विकास को कोई नही रोक सकता ।।

” जय हिंद ,जय भारत “

श्रीमति क्षमा दिलीप जी कुमरावत

अध्य्क्ष

महिला मंडल

राजपुर

महिला सशक्तिकरण

महिला, पुरुष का साथी है, जो कि भगवान द्वारा सामान मानसिक ताकत या शक्ति के साथ भेंट दी गयी है।महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें सामाजिक और पारिवारिक सीमाओं को छोड़ उन्हें अपने मन, विचार, अधिकार, निर्णय आदि से सभी पहलुओं में स्वतंत्र बनाने कि आवश्यकता है। पुरुष और महिला को सामान रूप से सम्मान और कार्य मिलने की जरूरत है।

महिला सशक्तिकरण प्रभावी होना तम्बोली समाज के उज्जवल भविष्य के लिए बहुत ही आवश्यक है। तंबोली समाज को पूरी तरीके से विकसित बनाने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना बहुत ही जरूरी है।

अध्यक्ष

सूर्य वंशी कुमरावत तम्बोली

समाज

महिला जागृति मंच,कोटा

श्रीमति शोभा.सुरेश मोदी

आज की महिला ही समाज निर्माण की आधारशिला है

 आज की महिला ही समाज निर्माण की आधारशिला है ।आज समाज के विकास का मापदंड महिलाओ के विकास से ही नाप जाता है ।समाज भी तभी तारक्की करता है जब नारिया ससक्त होती है

श्री मति मंजू कैलाश कुमरावत।

अध्य्क्ष महिला

कुमरावत तम्बोली समाज

 बड़वानी

महिला सशक्त

महिला समाज में तभी सशक्त हो सकती है जब उसे स्वयं के घर से ही सम्मान मिलना प्रारंभ हो इसके लिए जरूरी है के उसे परिवार में बराबरी का दर्जा हासिल हो और इसकी शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी होगी महिला सशक्त होगी तो समाज की उन्नति तीव्र गति से होगी और हमारा समाज तेजी से विकास करेगा।

श्री मति ममता अनिल जी मोदी

उदयपुर महिला अध्यक्ष

अपने घर से शुरु करे


देश हो या समाज दोनो को आगे बडाना है तो महीलाऔ का सशकत होना जरूरी है ये ओर कही नही आप अपने घर से शुरु करे


अध्यक्ष

श्री मति मंगला धुलचदं जी


सूयंवशी तंबोली समाज


महिला मंडल बाँसवाडा

समाज ओर घर परिवार की उन्नति के लिए महिलाओ को आगे आना बहुत जरुरी है

श्री मति चंद्र कला लादूलाल जी सिरोहिया

अध्यक्ष प्रगति शील महिला मण्डल

भीलवाड़ा

महिलाएँ समाज की प्रगति का आयना होती है

महिलाएँ किसी भी समाज की प्रगति का आयना होती है तथा समाज मे संस्कारो.परम्पराओं व संस्कॄति की वास्तविक संरक्षिका होती है l एक शिक्षित महिला दो कुटुम्बो के उत्थान एवं प्रगति की आधारशिला है l आज जब अति पिछडे समाज भी प्रगति के पथ पर अग्रसर है तो ज़रूरत है हमारे समाज की महिलाएँ भी मानसिक.सामाजिक व आर्थिक स्तर पर स्वम में आत्मविश्वास पैदा कर समाज को शश्क्त बनावे l

आइये समाज सुधार व उत्थान के इस यज्ञ में हम अपनी सामाजिक बुराइयों बालिकाओं को शिक्षित कर एक सभ्य समाज के निर्माण में सहयोग देवेl पुनश्च:शुभकामनाओं के साथ……

शुभकामना संदेश

श्री कन्हैंया जी मोदी

सादर वंदे

आपके द्वारा कुमरावत तम्बोली समाज के नाम से निर्मित वेबसाइड निश्चय ही समाज के उत्थान एवं प्रगति मे एक मिल का पत्थर साबित होगी! एक छोटे से कस्बे से.अपने स्वम के स्त्रोतों से समाज सेवा की


दिव्य ज्योति जलाने के जज्बे के लिये सम्पूर्ण तम्बोली समाज की और से आपको बहुत _बहुत बधाई l

श्रीमति डॉ.अनीता प्रदीप तम्बोली

प्रोफेसर

राजकीय कला/राज़.वाणिज्य

महाविद्यालय कोटा.(राज़)

हमें एकजुट होना है

भविष्यकाल कल्पना है भूतकाल है सपना

और ये जो वर्तमान यही काल है अपना।

मेरा मत है कि हमारा समाज एक विशाल वटवृक्ष की तरह है जिसमें पत्र पल्लव तो बहुत हैं पर सब बिखरे हुए,इसलिए सबसे पहले तो हमें एकजुट होना है।समृद्ध और उन्नत समाज का आरंभ होता है संगठित परिवार से।यदि हमारे परिवार संगठित होंगे तो समाज स्वत:ही सुसज्जित और संगठित हो जाएगा।हम वर्तमान में परिवार और समाज सुधारेंगे तो भविष्य स्वत: ही उज्ज्वल हो जाएगा।

श्रीमति -मोना अनुप कुमरावत

(अध्यक्ष)

श्री सूर्यवंशी कुमरावत जागृति

महिला मण्डल,झालावाड़

“” परिवार से हो ,आगे बढ़ने की प्रेरणा””

” यत्र पुज्यन्ते नारी: ,रमन्ते तत्र देवता: ।”

जिस घर मे नारियो का मान सम्मान होता है, उनको इज्जत दी जाती हैं, उनको खुश रखा जाता हैं ,वही ईश्वर निवास करते हैं।कहते है कि आज की महिला पुरुषों के साथ बराबरी से कार्य कर रही है लेकिन फिर भी महिलाओ को उनके पूर्ण अधिकार प्राप्त नही हैं।महिलाओ में भी संकोच की भावना बनी हुई है ,परिवार या समाज मे आगे आने में वे संकोच करती हैं ,जबतक महिलाएं बेझिझक आगे नही आएगी ,तब तक समाज तरक्की नही कर सकता ,और ये कार्य उन्हें अपने घर परिवार से शुरू करना होगा और इस कार्य के लिए उन्हें अपने परिवार का सहयोग जरूरी हैं।अगर परिवार और समाज का सहयोग मिल जाये तो नारियां भी समाज मे प्रेरणादायक कार्य कर सकती हैं।में मात्रश्कित से निवेदन करूँगी ,आप नि:संकोच आगे आये ,आप सभी मे अपार शकितयां हैं, अनेक योग्यताएं हैं।जो समाज के काम आ सकते है।। धन्यवाद

अध्यक्ष

श्रीमति मंजु जी कुमरावत

कुमरावत तम्बोली समाज

महिला मण्डल जिला अध्यक्ष

नारी का सम्मान

नारी का सबसे पवित्र रूप मां के रूप में देखने में आता है। माता यानी जननी। मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। मां देवकी (कृष्ण) तथा मां पार्वती (गणपति/ कार्तिकेय) के संदर्भ में हम देख सकते हैं इसे।

किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है। यह चिंताजनक पहलू है। सब धन-लिप्सा व अपने स्वार्थ में डूबते जा रहे हैं। (सिर्फ) मेरी बीवी व मेरे बच्चे यही आजकल परिवार की परिभाषा रह गई है। फिर बुजुर्ग माता-पिता की सेवा कौन करे? यह सवाल आजकल यक्षप्रश्न की तरह चहुंओर पांव पसारता जा रहा है। नई पीढ़ी को आत्मावलोकन करना चाहिए।

नारी का सम्मान सदा होना चाहिए। संस्कृत में एक श्लोक है- ‘यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता: (भावार्थ- जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं।) किंतु आज हम देखते हैं कि नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है। उसे ‘भोग की वस्तु’ समझकर आदमी ‘अपने तरीके’ से ‘इस्तेमाल’ कर रहा है।

बच्चों में संस्कार भरने का काम मां (नारी) द्वारा ही किया जाता है। यह तो हम सभी बचपन से सुनते चले आ रहे हैं कि बच्चों की प्रथम गुरु मां ही होती है। मां के व्यक्तित्व-कृतित्व का बच्चों पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार का असर पड़ता है।

इतिहास उठाकर देखें तो मां पुतलीबाई ने गांधीजी व जीजाबाई ने शिवाजी महाराज में श्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण किया था। जिसका ही परिणाम है कि शिवाजी महाराज व गांधीजी को हम आज भी उनके श्रेष्ठ कर्मों के कारण आज भी जानते हैं। इनका व्यक्तित्व विराट व अनुपम है।

देवी अहिल्याबाई होलकर, मदर टेरेसा, इला भट्ट, महादेवी वर्मा, राजकुमारी अमृत कौर, अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी और कस्तूरबा गाँधी आदि जैसी कुछ प्रसिद्ध महिलाओं ने अपने मन-वचन व कर्म से सारे जग-संसार में अपना नाम रोशन किया है। कस्तूरबा गांधी ने महात्मा गांधी का बायां हाथ बनकर उनके कंधे से कंधा मिलाकर देश को आजाद करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इंदिरा गांधी ने अपने दृढ़-संकल्प के बल पर भारत व विश्व राजनीति को प्रभावित किया है। उन्हें लौह-महिला यूं ही नहीं कहा जाता है। इंदिरा गांधी ने पिता, पति व एक पुत्र के निधन के बावजूद हौसला नहीं खोया। दृढ़ चट्टान की तरह वे अपने कर्मक्षेत्र में कार्यरत रहीं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन तो उन्हें ‘चतुर महिला’ तक कहते थे, क्योंकि इंदिराजी राजनीति के साथ वाक्-चातुर्य में भी माहिर थीं।अंत में हम यही कहना ठीक रहेगा कि हम हर महिला का सम्मान करें, क्योंकि दुनिया की आधी आबादी के बलबूते पर ही आदमी यहां तक आया है। उसे ठुकराना नहीं चाहिए।

जिस सीढ़ी (महिला) के बलबूते पर आदमी यहां तक आया, उसका तिरस्कार, अपमान कतई उचित नहीं कहा जा सकता है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी, दुर्गा व लक्ष्मी आदि का यथोचित सम्मान दिया गया है अत: उसे उचित सम्मान दिया जाना चाहिए।

सीमा मोदी w / o विनोद मोदी

(आर्थिक और सांख्यिकी विभाग)

सूर्यवंशी कुमरावत तम्बोली समाज

महिला मंडल, जयपुर (राजस्थान)

माता के रूप में नारी प्रथम गुरू होती है

“जिस समाज मे नारि का स्थान सम्मानजनक होता है , वह उतना ही प्रगतिशील ओर विकासित होता है | परिवार और समाज के निर्माण मे नारि का स्थान सदेव मह्त्वपूर्ण रहा है | जब समाज सश्क्त ओर विकसीत होता है तब राष्ट्र भी मजबूत होता है | इस प्रकार राष्ट्र निर्माण में नारी केन्द्रीय भुमिका का निर्वहन करती है | माता के रूप में नारी प्रथम गुरू होती है | “

” एक अच्छी माता सो शिक्षको के बराबर होती है इसलिए उसका हर हालत में सम्मान होना चाहिये |

श्री मति संगीता अनिल कुमरावत |

अध्यक्ष महिला

कुमरावत त्म्बोली समाज

कुक्षि

युवा पीढ़ी का भविष्य

किसी भी समाज मे युवा पीढ़ी का भविष्य, बचपन मे मीले संस्कार ही निर्धारित करते है, इन्ही संस्कारो से परिवार, समाज और राष्ट्र का सुदृढ़ निर्माण होता है ।

नारी का प्रथम रूप है कन्या जिसे माता पिता बीजरूप से सींचकर एक पौधे से वृक्ष बनने की पहली सीढ़ी तक पहुँचाते है, फिर यही युवावृक्ष अपने गुण-सुगंध के साथ फैलकर ससुराल में वंशवृक्ष बन जाती है ।

पौधे से वृक्ष बनने तक के सफर में कई रिश्तों के अनुभव से प्राप्त गुण और अवगुण के आधार पर इसके व्यक्तित्व का निर्माण होता है ।

समाज के प्रत्येक नारी पुरुष का कर्तव्य है कि ईश्वर की दी हुई अनुपम सौगात, यह पौधा हमारे आंगन में खिले या दूसरे के आंगन से हमारे आंगन में वंशवृक्ष बनने के लिए आए, इसे अपने बीते जीवन के अच्छे-बुरे अनुभव के आधार पर सहेज कर सिंचित करे ताकि यह मीठे फल और फूलों से घर आंगन को सुवासित एवं सुशोभित करे –

श्रीमती अनिता अशोक तम्बोली

छोटीसादड़ी (राज.)

नारी ही राष्ट्र निर्माण की धुरी है

भारतीय जन जीवन की मूल धुरी ही नारी है यदि यह कहा जाय की संस्कृति परंपरा या धरोहर नारी के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है तो यह अतिशयोक्ति नहीं है जब जब समाज के जड़ता आई है नारी शक्ति ने ही उसे जगाने के लिए अपनी संतति को तैयार किया है ओर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है नारी दायित्वों से लदी महिलाओं ने अपनी दोगनी शक्ति का प्रदर्शन कर सिद्ध कर दिया की समाज की उन्नति केवल पुरुषों के कंधे पर नहीं है उन्नत राष्ट्र की कल्पना तभी यथार्थ रूप धारण कर सकती है जब महिलाएं सशक्त होकर राष्ट्र को सशक्त करे महिला स्वयं सिद्दा है वह गुणों की संपदा है आवश्यकता है इन शक्तियों को महज प्रोत्साहन देने की यही समय की मांग है

श्रीमती मीना संतोष तांबुलकर ( पार्षद)

टिमरनी जिला हरदा

 

kumrawat Tamboli Samaj

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