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  • सोचो क्या करते है हम
  • ये उदयपुर मोक्ष धाम का दृश्य है
  • जो पगड़ीया और साडिया हम मृतक कोआखिरी रिवाज़ के अनुसार से ओडाते वो वापस बाजार मेँ बिकने जाती है या फिर थेलिया बनती है जिनमे हम सब सामान लाते है
  • इस रिवाज़ के जिम्मेदार भी हम ही है और हमें ही बदलना है साड़ी और पगड़ी की जगह पर प्रत्येक व्यक्ति एक -एक सूखा नारियल या नारियल का गोला ले कर आए जो दाह संस्कार मे काम आ सके
  • आदरणीय बंधुओ विवाह सीजन चालू है इस दौरान शादी समारोह में या बारात में आप जाओ तो आपसे हाथ जोड़कर एक छोटी सी विनती करता हूँ कि नृत्य करती हुई बहन बेटियो का फोटो या वीडियो ना बनाये।आप उसका फोटो लेकर या वीडियो बनाकर करोगे क्या? आपने तो लाइव देख लिया फिर दुनिया को दिखाने की क्या जरूरत है। आप उन फोटो/ विडियोज को अपने किसी मित्र को भेजोगे और वो किसी अपने मित्र को भेजेगा। कुछ सामाजिक कंटक होते हैं जो उन विडियोज पर डांस बार के गाने सेट करते हैं। फिर वो सुनने या देखने में अच्छा नहीं लगता। किसी बहन बेटी की फोटो या वीडियो भेजकर समाज की छवि खराब ना करे।हमारे लिए दुःख की बात है कि हम खुद ही गलतिया करते हैं। आज के समय में सभी के पास स्मार्टफोन होता है। किसी शादी ब्याह या किसी समारोह में अपने स्मार्टफोन का दिखावा ना करे।अपने दोस्तों से मुलाकात कीजिये, उनसे सामाजिक मुद्दों पर चर्चा कीजिये। क्या पता आपके विचार समाज में व्याप्त कुरीतियो को खत्म करने में कारगर साबित हो जाये।स्त्री हर घर होती है बस उसके रूप अलग अलग होते हैं-माँ, बहन, बेटी, पत्नी।कृपया एक बार फिर विनती करता हूँ कि गलत हरकतों से दूर रहे। समाज को अच्छाइयों की ओर अग्रसर करे। समाज उत्थान में भूमिका निभाये।
  • मृत्यु भोज पर कविता
  • जिस आँगन में पुत्र शोक से
  • बिलख रही माता,
  • वहाँ पहुच कर स्वाद जीव का तुमको कैसे भाता।
  • पति के चिर वियोग में व्याकुल
  • युवती विधवा रोती,
  • बड़े चाव से पंगत खाते तुम्हें पीर नहीं होती।
  • मरने वालों के प्रति अपना
  • सद व्यहार निभाओ,
  • धर्म यही कहता है बंधुओ मृतक भोज मत खाओ।
  • चला गया संसार छोड़ कर
  • जिसका पालन हारा,
  • पड़ा चेतना हीन जहाँ पर वज्रपात दे मारा ।
  • खुद भूखे रह कर भी परिजन
  • तेरहबी खिलाते,
  • अंधी परम्परा के पीछे जीते जी मर जाते।
  • इस कुरीति के उन्मूलन का
  • साहस कर दिखलाओ,
  • धर्म यही कहता है बंधुओ,मृतक भोज मत खाओ।…….
  • हर समाज के लिए विचारणीय:
  • (1) आज काफी लड़कियों के माँ- बाप अपनी बेटियों की शादी में बहुत विलंब कर रहे हैं। उनको अपने बराबरी के रिश्ते पसंद नहीं आते और जो बड़े घर पसंद आते हैं उनको लड़की पसंद नहीं आती। शादी की सही उम्र 22 से 27 तक है पर आज माँ-बाप ने और अच्छा करते-करते उम्र 30 से 36 कर दी है । जिससे उनकी बेटियों के चेहरे की चमक भी कम होती जाती है । और अधिक उम्र में शादी होने के उपरांत वो लड़का उस लड़की को वो प्यार नहीं दे पाता जिसकी हकदार वो लड़की है । किसी भी समाज में 30% डिवोर्स की वजह यही दिखाई दे रही है । आज जीने की उम्र छोटी हो चुकी है। पहले की तरह 100+ या 80+ नहीं होती। अब तो केवल 65+ तक जीने को मिल पायेगा। इसी वजह से आज लड़के उम्र से पहले ही बूढ़े नजर आते हैं, सर गंजा हो जाता है ।
  • (2) आज ज्यादातर लड़की वाले लड़के वालों को वापस हाँ /ना का जवाब नहीं दे रहे हैं। संभवत: कुछ लोग मन में आपको बुरा-भला बोलते होंगे। आप अपनी लाडली का घर बसाने निकले हैं, किसी का अपमान करना अच्छा नही होता। कृपया आप लड़के वालों से सम्मान जनक जरूर बात करें।
  • (3) कुंडली मिला के जिन्होंने भी रिश्ते किये,आज उनके भी रिश्ते टूटे हैं। फिर आप लोग क्यों कुंडली का जिक्र कर के रिश्ता ठुकरा देते हैं। इतिहास गवाह है। हमारे पूर्वजों ने शायद कभी कुंडली नहीं मिलाई और सकुशल अपनी शादी की 75 वीं सालगिरह तक मनाई। आप कुंडली को माध्यम बनाके बच्चों को घर में बिठा के रखे हैं। उमर बढ़ती जा रही है, आता-जाता हर यार-दोस्त-रिश्तेदार सवाल कर जाता है, कब कर रहे हो शादी ? आपसे 10 वर्ष कम आयु के लोगों को 8 साल के बच्चे भी हो गए। आप 32-35 में शादी करेंगे तो आपके बच्चों की शादी के वक्त आप अपने ही बच्चों के दादा- दादी नजर आएंगे।
  • (4) आप घर कैसा भी चयन करें! लड़की का भाग्य उसके पैदा होने से पहले ही भगवान ने लिख दिया है। भाग्य में सुख लिखे हैं तो अंधेरे घर में भी रोशनी कर देगी और दुख लिखे हैं तो पैसे वाले भी डूब जाते हैं।
  • (5) अंतिम में बस इतना ही कहना है कि अपने बच्चों की उम्र बर्बाद ना करें। गयी उम्र लौट कर नहीं आती। दूसरों को देख कर अपने लिए भी वैसा ही रिश्ता देखना मूर्खता है। आप अपने बच्चों की बढ़ती उम्र के दुख को समझिए। रिश्ता वो करिये, जिस में लड़के वालों में लालच ना हो। लड़का संस्कारी हो, जो आपकी बेटी को प्यार करे, उसकी इज्जत करे। उम्र बहुत छोटी है । आप इतने जमीन-जायदाद देख कर क्या कर लेंगे ? कौन अपने साथ एक तिनका भी ले जा पाया है ! बच्चों की बाकी उम्र उनके जीवन साथी के साथ जीने दीजिये।समय बहुत बलवान है। आज की लड़कियाँ पढ़ी-लिखी हैं। वो अपने परिवार के साथ कुछ अच्छा तो कर ही सकती हैं।
  • (6) अपनी लड़कियों के लिए साधन संपन्न घर में रिश्ता तलाशने की बजाय संस्कारी घर में तलाश करें। योग्यता होगी तो साधन सम्पन्न वे खुद हो जाएंगे और सही मायने में तभी उसकी कद्र करेंगे ।
  • (7) यदि कन्या वाले मध्यम वर्गीय परिवार से हैं तो अपने बीच के परिवार से ही रिश्ता करिये, आपकी लड़की अपना भाग्य खुद सँवार लेगी, योग्यता और संस्कार के बूते ।
  • गहरे मन से विचार करें। जरूर आपको एक उम्मीद की रोशनी दिखेगी ,और रिश्तों की राह आसान हो जाएगी l
  • लेख को पढ़ने के पश्चात जनजागरूकता हेतु साझा अवश्य करें!
  • वंदेमातरम्
  • पेरावनी हेतु प्रतिबन्ध
  • हमारे समाज में शादी या किसी भी प्रोग्राम में कपड़े लाने लेजाने की प्रथा को सभी अपने अपने घर से बन्द करे और उस जगह पर आप किसी भी प्रोग्राम या शादी में आयोजनकर्ता को पैसे का लिफाफा दे जिसे आयोजनकर्ता को और हमारे समाज के सभी लोगो को फायदा मिल सके आप किसी भी शादी या प्रोग्राम में पेरावनी हेतु चाहे 500 या 1000 रुपये की भी ड्रेस या कपड़े ले कर जाते है फिर भी वह पहनता कोई नही है और वह आगे से आगे देने लेने में ही काम आते है और अगर आप कपड़े की जगह पैसे के लिफाफे दे तो उस जगह शादी या प्रोग्राम करने वाले के वह पैसे तुरन्त काम आएंगे ओर मदद भी मिल जाएगी आज हमारे समाज मे बहुत से ऐसे गरीब और कमजोर लोग भी है जिनको इसे से बहुत फायदा होगा हमारे समाज मे अगर किसी के घर मे शादी होती है तो कम से कम 900 या 1000 मेहमान आते है और वो सभी अगर 500 या 1000 रुपये के कपड़े न लाकर खाली 200 रुपये का लिफाफा भी दे तो 2लाख रुपये होते है अब आप ही बताओ कि 2लाख से उन पैसो से हमारे समाज मे उन आयोजनकर्ता को तुरन्त कितनी मदद मिलेगी वह पैसा उनके तुरन्त काम आ जाएगा और हमारे समाज मे किसी को भी शादी या प्रोग्राम में पैसो से इतनी परेशानी नही होगी इसलिए हमारे समाज के सभी महानुभवों अनुरोध है कि कपड़े देने लेने की प्रथा को अपने अपने घर से तुरन्त बन्द करे और अगर आप के घर मे कोई प्रोग्राम है या शादी है तो आप कार्ड में नीचे एक लाइन जरूर लिखवाए
  • किसी भी तरह की पेरावनी या कपड़े मान्य नही होंगे
  • इसके बाद भी अगर कोई कपड़े लेकर आ जाए तो आप रखे नही
  • पेरावनी बन्द करने में हमारे समाज के सभी महानुभावो को इसमे मदद करनी पड़ेगी और सभी को अपने अपने घर से ही बन्द करनी होगी इस मैसेज को हमारे समाज के सभी लोगो तक भेजे
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  • दोस्तो यह मेरी सोच हे और आगे आपकी मर्ज़ी
  • उठता लहंगा,बढ़ती इज्जत (??)
  • सन 1980 तक लड़कियाँ कालेज में साड़ी पहनती थी या फिर सलवार सूट। इसके बाद साड़ी पूरी तरह गायब हुई और सलवार सूट के साथ जीन्स आ गया। 2005 के बाद सलवार सूट लगभग गायब हो गया और इसकी जगह Skin Tight काले सफेद स्लैक्स आ गए। फिर 2010 तंक लगभग पारदर्शी स्लैक्स आ गए जिसमे आंतरिक वस्त्र पूरी तरह स्प्ष्ट दिखते हैं।
  • फिर सूट, जोकि पहले घुटने या जांघो के पास से 2 भाग मे कटा होता था, वो 2012 के बाद कमर से 2 भागों में बंट गया और फिर
  • 2015 के बाद यह सूट लगभग ऊपर नाभि के पास से 2 भागो मे बंट गया जिससे कि लड़की या महिला के नितंब पूरी तरह स्प्ष्ट दिखाई पड़ते हैं और 2 पहिया गाड़ी चलाती या पीछे बैठी महिला अत्यंत विचित्र सी दिखाई देती है, मोटी जाँघे, दिखता पेट।
  • आश्चर्य की बात यह है कि यह पहनावा कालेज से लेकर 40 वर्ष या ऊपर उम्र की महिलाओ में अब भी दिख रहा है। बड़ी उम्र की महिलायें छोटी लड़कियों को अच्छा सिखाने की बजाए उनसे बराबरी की होड़ लगाने लगी है। नकलची महिलाए।
  • अब कुछ नया हो रहा 2018 मे, स्लैक्स ही कुछ Printed या रंग बिरंगा सा हो गया और सूट अब कमर तक आकर समाप्त हो गया यानि उभरे हुए नितंब अब आपके दर्शन हेतु प्रस्तुत है.
  • जरा इस पर विचार कीजियेगा।
  • चलो एक नई पहल करते है ।
  • अक्सर देखने मे आता है कोई भी सामाजिक कार्य मे पंगत मे लोगो व महिलो द्वारा पतल पर इतना भोजन रखवा लिया जाता है कि एक ओर खा सकता है और फिर उस भोजन को छोड़कर उठ जाते है, भोजन व्यर्थ जाता है । अब सवाल उठता है कि क्या हम अपने घर मे ऐसा भोजन व्यर्थ छोड़ते है , या इसे अपनी शान समझते है ।ऐसा मनन करे । इसको कैसे रोका जावे ।
  • गॉधीगिरी एक तरीका समाज मे कही पर भी सामूहिक भोज हो चाहे व्यक्तिगत हो या पंचायती रसोई हो यदि कोई पुरुष या महिला द्वारा पतल पर यदि झूठन छोड़ना देखा जावे तो पांच लोगो द्वारा ऐसे व्यक्ति या महिला को उसी पतल पर खडा कर फोटो खिंचवाया जावे उसका फूल माला से स्वागत किया जावे उसके बारे मेे दो शब्द कहकर तरीफ की जावे और ऐसा महिलाओ मे महिलओ से पुरुषो मे पुरुष से करवाया जावे इसके बाद परिणाम देखे । यह मेरा व्यक्तिगत सुझाव है ।
  • पेरावनी (कपडा प्रथा) हेतु प्रतिबन्ध
  • साथियो
  • हमारे जाति/समाज में शादी या किसी भी प्रोग्राम में कपड़े लाने ले जाने की प्रथा को सभी अपने अपने घर से बन्द करे और उस जगह पर आप किसी भी प्रोग्राम या शादी में आयोजनकर्ता को पैसे का लिफाफा दे जिसे आयोजनकर्ता को और हमारे समाज के सभी लोगो को फायदा मिल सके.
  • आप किसी भी शादी या प्रोग्राम में पेरावनी हेतु चाहे 500 , 1000 या 5000 रुपये की भी ड्रेस या कपड़े ले कर बडे प्यार से जाते है फिर भी वह कपडे पहनता कोई नही है.
  • कपडे लेने वाला पेटियो मे भर भर के रख लेता है और वह आगे से आगे देने लेन में ही वे कपडे खपाते है इस तरह समय व पैसो की बर्बादी के अलावा कुछ नही मिलता समाज को ??
  • अगर आप कपड़े की जगह पैसे के लिफाफे दे तो उस जगह शादी या प्रोग्राम करने वाले को वह पैसे तुरन्त काम आएंगे ओर मदद भी मिल जाएगी.
  • *आज हमारे समाज मे बहुत से ऐसे गरीब और कमजोर लोग भी है जिनको इसे से बहुत फायदा होगा हमारे समाज मे अगर किसी के घर मे शादी होती है तो कम से कम 900 या 1000 मेहमान आते है और वो सभी अगर 500 या 1000 रुपये के कपड़े न लाकर खाली 200 रुपये का लिफाफा भी दे तो 2 लाख रुपये होते है अब आप ही बताओ कि 2लाख से उन पैसो से हमारे समाज के उन आयोजनकर्ता को तुरन्त कितनी मदद मिलेगी वह पैसा उनके तुरन्त काम आ जाएगा और हमारे समाज मे किसी को भी शादी या प्रोग्राम में पैसो से इतनी परेशानी नही होगी इसलिए हमारे समाज के सभी महानुभवों से अनुरोध है कि कपड़े देने लेने की प्रथा को अपने अपने घर से तुरन्त बन्द करे और अगर आप के घर मे कोई प्रोग्राम है या शादी है तो आप कार्ड में नीचे एक लाइन जरूर लिखवाए
  • किसी भी तरह की पेरावनी या कपड़े मान्य नही होंगे
  • इसके बाद भी अगर कोई कपड़े लेकर आ जाए तो आप रखे नही
  • पेरावनी बन्द करने में समाज के सभी महानुभावो को इसमे मदद करनी पड़ेगी और सभी को अपने अपने घर से ही बन्द करनी होगी ।
  • इस मैसेज को समाज के सभी लोगो तक पहुँचाने का कष्ट करे
  • प्री वेडींग वास्तव में समाज के अंदर एक नया प्रदूषण हैं
  • अवश्य पढें – अन्यथा आप भी तैयार रहें अपने जीवन को दुःखी करने के लिए!!
  • फिर पछतावत होत क्या जब चिड़ियां चुग जाये खेत –
  • प्री वेडिंग – यानी भारतीय संस्कृति के संपन्न घरेलु परिवारो में पश्चिमी संस्कृति का आगमन –
  • सम्माननीय बंधुवर
  • पिछले 1 – 2 वर्षो से देश में भारतीय संस्कृति से होने वाले विवाह समारोह में एक नया प्रचलन सामने आया हैं!!
  • जिसको वर्तमान में बडे परिवारो द्वारा आयोजित किया जा रहा हैं!!
  • जो समाज के अंदर रीढ़ कि हड़्ड़ी कहें जाते हैं!!
  • – उस प्रोग्राम का नाम हैं – प्री वेडिंग –
  • इसके तहत होने वाले दूल्हा – दुल्हन अपने परिवारजनों की सहमति से
  • शादी से पुर्व फ़ोटो ग्राफर के एक समूह को अपने साथ में लेकर
  • देश के अलग – अलग सैर सपाटो की जगह ,बड़ी होटलो,हेरिटेज बिल्डिंगों,समुन्द्री बीच व अन्य ऐसी जगहों पर जहाँ सामान्यतः पति पत्नी शादी के बाद हनीमून मनाने जाते हैं!!
  • वहां जाकर अलग – अलग और कम से कम परिधानों में एक दूसरे की बाहो में समाते हुए
  • वीडियो शूटिंग करवाते हैं!!
  • और फिर उसी वीडियो फ़ोटो ग्राफी को शादी के दिन एक बड़ी सी स्क्रीन लगाकर!!
  • जहाँ लड़की और लड़के के परिवार से जुड़े तमाम रिश्तेदार मौजूद होंते हैं!!
  • की उपस्थिति में सार्वजनिक रूप से उस कपल को वह सब करते हुए दिखाया जाता हैं!!
  • जिनकी अभी शादी भी नहीं हुई हैं!!
  • और जिनको जीवन साथी बनने के साक्षी बनाने और उन्हें आशीर्वाद देने के लिये ही सगे संबंधियो और सामाजिक लोगो को वहा बुलाया जाता हैं!!
  • लेकिन यह क्या गेट के अंदर घुसते ही जो देखने को मिलता हैं!!
  • वह शर्मसार करने वाला होता हैं!!
  • जिस भावी कपल को हम वहा आशीर्वाद देने पहुँचते हैं!!
  • वह कपल वहां पहले से ही एक दूसरे की बाहो में झूल रहे होंते हैं!!
  • और सबसे बड़ी बात यह हैं की यह सब दोनों परिवारो की सहमति से होता हैं!!
  • इन सब सच्चाई को देखकर एक विचार मन में आता है!!
  • जब सब कुछ हो चुका हैं तो आखिर हमें यहाँ क्यों बुलाया गया हैं!!
  • यह शुरुआत अभी उन घरानो से हो रही हैं!!
  • ऐसे बड़े परिवारों के ऐसी शादियों को जो अपने पैसो के बल पर इस प्रकार की गलत प्रवर्तियो को बढ़ावा देकर समाज के छोटे तबके के परिवारो को संकट में डाल रहे हैं!!
  • मेरा समाज के उन सभी सभ्रांतजनो से अनुरोध हैं कि – अपने- अपने समाज में ऐसी पश्चिमी संस्कृति को बढ़ावा देने वाले परिवारो से ऐसी प्रवृत्ति को बंद करने का अनुरोध करें!!
  • अन्यथा ऐसी शादियों का सामाजिक रूप से खुलेआम बहिष्कार करें!!
  • तब ही ऐसे गंदे प्रवर्तियो पर रोक लगना संभव हो सकेगा!!
  • अन्यथा ऐसी संस्कृति से आगे चलकर समाज का इतना बड़ा नुकसान होंगा जिसकी भरपाई कई पीढ़ियों तक करना संभव नहीं हो सकेंगा!!
  • और कुछ परिवारों की वजह से शादी जैसे पवित्र बंधन पर शादी से पूर्व ही एक बदनुमा दाग लगेगा!!
  • जिसका खामियाजा समाज के छोटे तबके को भुगतना पड़ेंगा!!
  • जिसकी परिणीति में शादी से पूर्व सम्बन्ध टूटना या शादी के बाद तलाक की संख्या में वृद्धि के रूप में होंगी!!
  • जरूर सोचे एवं विचार करें की आप और हम इतने गंदे काम का समर्थन क्योंकर रहे हैं???
  • सुनने में आ रहा हैं कि कोरियोग्राफर के साथ मुम्बई के बहुत ही अच्छे घरानों की तीन शादी – शुदा 👩🏻औरतें भाग चुकी हैं!!!।
  • इसलिए बंद करों यह महिला संगीत और 💃🏻नाच – गानें!!
  • महिने दो महिने तक बंद कमरे में एक्शन सिखाने के बहाने कमर में हाथ डालकर नचाते हैं आपकी बहू – बेटीयों के साथ … आखिर क्या हांसिल होता हैं… शादी ब्याह में स्टेज पर कुछ ठुमके लगाने से… क्या वे नृत्य की राष्ट्रीय ऊचाइयों के आसपास भी होती हैं… फिर क्यों परिवार के लोग नृ… Read more
  • ऐरे-गैरों के साथ भागकर ऐरे ..गैरों के साथ रिस्ता जोडऩे से आख़िर क्या मिलता है 
  •  
  • ऐसा करने से तो….
  • • अपना समाज कमजोर बनता है,
  • • सौभाग्य से मिला हुआ धर्म नष्ट होता है,
  • • मां-बाप और परिवार की आबरू जाती है,
  • • उन्हें रुला कर कोई सुखी नहीं हो पाती है,
  • • संस्कार और संस्कृति का सर्वनाश होता है,
  • • अभावग्रस्त, चिंतातुर, असुरक्षित जिंदगी होती है.
  • • भाग कर गयी हुई अधिकांश कन्याएं आज दुःखी हैं,
  • • परेशान होकर अनेकों ने तो आत्महत्या कर ली है.
  • • हजारों कन्याएं भागकर, औंधे मुंह की खाकर, वापस घर आयी हैं.
  • • वे न घर की रही हैं, न घाट की.
  • • हजारों ऐसी कन्याएं हैं, जिनके दूसरी बार विवाह करवाने पड़े हैं.
  • • पहला विवाह जिंदगी की मजबूती है,
  • • दूसरा विवाह तो जिंदगी की मजबूरी है.
  • • मजबूरी की जिंदगी भी क्या जिंदगी !
  • जरा सोचो !
  • • शारीरिक सुख की चाह में, भावनाओं के आवेग और एट्रेक्शन में, भागकर शादी तो कर लोगी, पर आपके भविष्य का क्या होगा ?
  • • किसी से आकर्षित होकर, पूरे खानदान से बेवफ़ाई कर, मनमाने ढंग से निर्णय लेकर जिंदगी फलेगी-फूलेगी नहीं !!
  • • अपने समाज में या अपने से मिलते-जुलते समाज में भी युवकों को देखा-परखा, आज़माया जा सकता है.
  • • एक तरफ समाज में कन्याओं की कमी हैं, दूसरी ओर भागकर अन्यत्र विवाह करने से समाज के युवकों की राह मुश्किल हो रही. इसमें आपके चाहने वाले भाई भी हो सकते हैं !
  • • लोग कहते हैं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ. अब कन्याओं की बेवफ़ाई से दुःखी होकर लोग कहने लगे हैं कि बेटी से बचाओ ! यह बहुत गौर करने जैसी बात है.
  • • कहीं आपके गलत कदम से माता-पिता को यह महसूस न हो कि हमने बिटिया को जन्म देकर बहुत बड़ी गलती की !
  • • याद रखो कि श्रेष्ठ खून से ही श्रेष्ठ संतानें पैदा होती हैं.
  • • ऐरे-गैरे युवकों से तो आप ऐरी-गैरी संतानों को जन्म दोगी,
  • • उन संतानों का क्या होगा ?
  • • वे कैसी होंगी और आपकी व उनकी जिंदगी का क्या हश्र होगा ?
  • • इतने बड़े सभ्य, संस्कारी, पढ़े-लिखे, समृद्ध समाज में क्या आपको अच्छे जीवन साथी नहीं मिल सकते ?
  • • क्या दीन-हीन, गरीब, सामान्य या निम्नस्तर के युवक के साथ भाग जाना ही जिंदगी की सफलता है ?
  • • नहीं ! यह नादानी और पागलपन है.
  • • मनोविज्ञान तो कहता है कि श्रेष्ठ बनने या श्रेष्ठ रहने के लिए श्रेष्ठ जीवन साथी का चुनाव आवश्यक है, जो अपने संरक्षण के साथ-साथ, समाज, धर्म, परंपरा और संस्कृति का पालक व पोषक हों !
  • • इसीलिए किसी से आंख मिलाने से पहले सोचो,
  • • किसी को मित्र बनाने से पहले सावधान बनो,
  • • किसी को दिल देने से पहले किसी सही इंसान की सलाह लो,
  • • आपका एक गलत निर्णय आपकी पूरी जिंदगी को तबाह कर सकता है !
  • • मानों न मानों, पर समाज ही अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा है और अपना परिवार ही सुख-शांति का हरा-भरा आशियाना !
  • – आचार्य श्री विमलसागरसूरिजी महाराज

kumrawat Tamboli Samaj

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